कुत्ते चले फिल्म की ओर
यह कविता मेरी नही है, कहीं से मिल गयी थी, तो यहाँ चिपका दी
एक समय की बात सुनाऊं छोटी सी है कहानी |
दो कुत्तों ने एक बार पिक्चर देखन की ठानी ||
पहुंचे दोनो फिल्म हाल, पर अन्दर कैसे जाएं |
फिल्म शुरु होने को थी, सूझा न कोइ उपाय ||
पहला बोला चुपके से हम अन्दर घुस जाएगें|
सीट के नीचे बैठेगें और फिल्म देख आएगें ||
पर क्या जाने फिल्म देखना था उनकी नादानी |
दो कुत्तों ने एक बार पिक्चर देखन की ठानी ||
दूजा बोला पकड़े गये तो इज्जत से जाएगें |
आदमी की मौत बिना वजह ही हम मारे जाएगें ||
एक एक करके देखेगें हम पिक्चर आधी आधी |
मै देखूगां मौत विलेन की तुम हीरो की शादी ||
पहला बोला कह दी तुमने ये तो बात सयानी |
दो कुत्तों ने एक बार पिक्चर देखन की ठानी ||
घुस गया पहला सीट के नीचे लगा देखने "शोले" |
देख बसन्ती को पर्दे पर बैठ गया मुहँ खोले ||
(पर्दे से धर्मेन्द्र की आवाज आयी "बसन्ती इन कुत्तों के सामने मत नाचना")
इन कुत्तों के सामने मत नाचना की सुन के आवाज |
बैठे बैठे कुत्ता भाई भूल गये सब काज ||
दौड़ा जैसे धर्मेन्द्र हो उसका दुश्मन जानी
दो कुत्तों ने एक बार पिक्चर देखन की ठानी ||
बोला बाहर आकर अन्दर हुआ तमाशा भारी |
हीरो ने था देख लिया मुझे और जनता थी सारी ||
नाच रुका था मेरे कारण मैनें अक्ल लगाई |
पकड़ा जाता जो मैं अन्दर होती खूब पिटाई ||
छुपना तुझे ना आया दूजा बोला बन कर ज्ञानी |
दो कुत्तों ने एक बार पिक्चर देखन की ठानी ||
दूजा जाकर बैठा ही था जोर से बोला गब्बर |
"अरे ओ सांभा उठा तो बन्दूक और लगा निसाना इस कुत्ते पर" ||
इतनी सुनी जो कुत्ते ने तो उड़ गये उस के तोते |
वो भी उड़ जाता गर उस के भी पर होते ||
कैसे देख लिया गब्बर ने थी उसको हैरानी |
दो कुत्तों ने एक बार पिक्चर देखन की ठानी ||
काँप रहीं थी टांगें थर थर जीभ आई थी बाहर |
बाहर आकर बात बताई उसने तो डर डर कर
जाने केसे देख लिया था मुझको तो गब्बर ने |
तेरे कारण नाच रुका था मैं तो चला था मरने ||
अब ना कभी देखेगें पिक्चर ये दोनो ने ठानी
दो कुत्तों की पिक्चर की होती है खत्म कहानी||
